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Hindi Shayari and Latest Shayari in Hindi : शायरी - Poetry latest-hindi-shayri

 Hindi Shayari and Latest Shayari in Hindi : शायरी - Poetry  latest-hindi-shayri
ग़र तेरी ख़ामोशियों में समन्दर का जोश है,
पर मेरे मुल्क का तो हर बच्चा सरफरोश है।

ख़ुशियों में झूम रहा हूँ तो यह मत समझना,
कि आज मदहोशी में यह फ़क़ीरा बेहोश है।

        लेखक ~ ✍🏼"पागल फ़क़ीरा"✍🏼

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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काल है यह कोरोना या कोई महाकाल है,
लगता है जैसे ख़ुदा का रचा महाजाल है।

संसार में आज घबराने की ज़रूरत नहीं,
"फ़क़ीरा" आज यहाँ हर कोई बेहाल है।

          लेखक ~ ✍🏼"पागल फ़क़ीरा"✍🏼

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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तेरी मेरी यारी, 
सब पर थी भारी||
तू साथ मेरे, 
 जब होती थी ||
एक अलग ही, 
साहस में जीती थी ||
जैसे जग से मैं, 
लड़ जाऊँगी ||
दुनिया बाल न बांका, 
मेरा कर पायेगी ||
होते थे जब साथ साथ, 
मस्ती बहुत करती थी ||
छीन सारी चॉकलेट, 
मैं तेरी खाती थी||
आती है याद अब भी, 
वो वक़्त क्यों नहीं आता अब ||
Miss you yr

   लेखक~ Varsha  Soni

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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बहते पानी की तरह है,
चाहत तुम्हारी ...

रुकती नही, 
थमती नही, 
थकती नही...
और मिलती भी तो नही !!!

            लेखक~ अज्ञात

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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न वख्त है ना कोई ऐसा विचार....
न तुम्हारे पास जाना है  ...
न बुलाने का कोई इरादा ....
ना प्यार ही बाकी है ...
ना कोई प्यार का वादा ...
फीकी सी बस कुछ याद है...
और रोया सा अधूरा मन !!

            लेखक~ अज्ञात

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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मोहब्बत भी हमने कुछ अजीब ढंग से की, 

दौर जिस्मों का था और हम दिल मांग बैठे।😭

       लेखक~💝नीरज मौर्या
        (नालासोपारा)

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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मैं क्या महोब्बत करूं किसी से, 
मैं तो गरीब हूँ

लोग अक्सर बिकते हैं, 
और खरीदना मेरे बस में नहीं

         लेखक~💝नीरज मौर्या
             (नालासोपारा)

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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गलतियाँ वो हमको गिनाने लगे है,
अभी तो मोहब्बत शुरु भी नही हुई और 
नखरे दिखाने लगे है,
जिसकी खातिर हम खुद की नज़रे झुका रहे थे,
अब वो ही आँख दिखाने लगे हैं !!

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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फूल फेंका पर मुझे पत्थर लगा,
आज पहली बार मुझे डर लगा।।

बरसों से रहते आया आज मुझे,
गांव से माँ को लाया तो घर लगा।।

देखा छत पे कबूतर  उड़ाते हुए,
वो हसीन,कातिल, दिलवर लगा।।

पीसा गया हूँ मैं बहुत तब जाकर,
तेरी  आँखो में यूँ ये काजर लगा।।

सर-ए-बाजार बेपरदा हीरोइने ये,
मजबूर तवायफ से हमें बद्दतर लगा।।

चंद पैसे कमाने की खातिर मेरा,
दांव पे अब तो गांव, घर,मग़र,लगा।।

गजलें कहना आसान नही केवल,
इनमें काफिया,रदीफ़,बहर, लगा।।

परिंदो को उड़ जाने तो दे इंसान,
काट रखे तूने फिर से वो पर लगा।।

कारण उनको तो कुछ पता ही नही,
दंगो में  जिनके  हाथ पत्थर  लगा।।

दूरियां नजदीकियों में तब्दील हों रब,
न फैसले में देरी नही उमर लगा ।।

"केवल" मौजूद हम रौशनी के लिए,
दिल के अंधेरे में उसे न खबर  लगा।।
       
लेखक ~ आनंद पाण्डेय"केवल"

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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काश हम दोनों एक साँस की डोरी में बंधे होते

हम डोरी को तोड़ कर जाए तो 
हम भी ना रहे और तुम भी ना रहो

और तुम तोड़ कर जाओ तो 
तुम भी ना रहो और मैं भी ना रहूं

              लेखक ~ अभिजीत

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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यह तो सोचा तुमने की तुम्हारे पीछे पड़े थे हम,
पर,
ये नहीं जाना की खुद से आगे माना हुआ था तुम्हें...

लेखक ~ योगेन्द्र राज शर्मा "योगी"

╭─❀⊰╯@Shayari_Ka_Samunder
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